मुख्य मेनू उघडा

<poem>

कैलासराणा शिवचंद्रमौळी | फणींद्र माथां मुकुटीं झळाळी | कारुण्यसिंधू भवदुःखहारी | तुजवीण शंभो मज कोण तारी || १||

रवींदु दावानल पूर्ण भाळीं | स्वतेज नेत्रीं तिमिरौघ जाळी | ब्रह्मांडधीशा मदनांतकारी | तुजवीण शंभो मज कोण तारी || २||

जटा विभूती उटि चंदनाची | कपालमाला प्रित गौतमीची | पंचानना विश्वनिवांतकारी | तुजवीण शंभो मज कोण तारी || ३||

वैराग्ययोगी शिव शूलपाणी | सदा समाधी निजबोधवाणी | उमानिवासा त्रिपुरांतकारी | तुजवीण शंभो मज कोण तारी || ४||

उदार मेरू पति शैलजेचा | श्रीविश्वनाथ म्हणती सुरांचा | दयानिधी जो गजचर्मधारी | तुजवीण शंभो मज कोण तारी || ५||

ब्रह्मादि वंदी अमरादिनाथ | भुजंगमाला धरि सोमकांत | गंगा शिरीं दोष महाविदारी | तुजवीण शंभो मज कोण तारी || ६||

कर्पूरगौरीं गिरिजा विराजे | हळाहळे कंठ निळाचि साजे | दारिद्र्यदुःखें स्मरणें निवारी | तुजवीण शंभो मज कोण तारी || ७||

स्मशानक्रीडा करितां सुखावे | तो देवचूडामणि कोण आहे | उदासमूर्तीं जटाभस्मधारी | तुजवीण शंभो मज कोण तारी || ८||

भूतादिनाथ अरिअंतकाचा | तो स्वामि माझा ध्वज शांभवाचा | राजा महेश बहुबाहुधारी | तुजवीण शंभो मज कोण तारी || ९||

नंदी हराचा हर नंदिकेश | श्री विश्वनाथ म्हणती सुरेश | सदाशिव व्यापक तापहारी | तुजवीण शंभो मज कोण तारी || १०||

भयानक भीम विक्राळ नग्न | लीलाविनोदें करि काम भग्न | तो रुद्र विश्वंभर दक्ष मारी | तुजवीण शंभो मज कोण तारी || ११||

इच्छा हराची जग हें विशाळ | पाळी रचीतो करि ब्रह्मगोळ | उमापती भैरव विघ्नहारी | तुजवीण शंभो मज कोण तारी || १२||

भागीरथीतीर सदा पवित्र | जेथें असे तारक ब्रह्ममंत्र | विश्वेश विश्वंभर त्रिनेत्रधारी | तुजवीण शंभो मज कोण तारी || १३||

प्रयाग वेणी सकळा हराच्या | पादारविंदीं वहाती हरीच्या | मंदाकिनी मंगल मोक्षकारी | तुजवीण शंभो मज कोण तारी || १४||

कीर्ती हराची स्तुति बोलवेना | कैवल्यदाता मनुजां कळेना | एकाग्रनाथ विष अंगिकारी | तुजवीण शंभो मज कोण तारी || १५||

सर्वांतरीं व्यापक जो नियंता | तो प्राणलिंगाजवळी महंता | अंकीं उमा ते गिरिरूपधारी | तुजवीण शंभो मज कोण तारी || १६||

सदा तपस्वी असे कामधेनू | सदा सतेज शशि कोटिभानू | गौरीपती जो सदा भस्मधारी | तुजवीण शंभो मज कोण तारी || १७||

कर्पूरगौर स्मरल्या विसांवा | चिंता हरी जो भजकां सदैवा | अंतीं स्वहीत सुचना विचारी | तुजवीण शंभो मज कोण तारी || १८||

विराम काळीं विकळ शरीर | उदास चित्तीं न धरीच धीर | चिंतामणी चिंतनें चित्तहारी | तुजवीण शंभो मज कोण तारी || १९||

सुखावसाने सकळें सुखाचीं | दुःखावसाने टळती जगाचीं | देहावसानें धरणी थरारी | तुजवीण शंभो मज कोण तारी || २०||

अनुहातशब्द गगनीं न माय | त्याचेनि नादें भव शून्य होय | कथा निजांगें करुणा कुमारी | तुजवीण शंभो मज कोण तारी || २१||

शांति स्वलीला वदनीं विलासे | ब्रह्मांडगोळीं असुनी न दीसे | भिल्ली भवानी शिव ब्रह्मचारी | तुजवीण शंभो मज कोण तारी || २२||

पीतांबरें मंडित नाभि ज्याची | शोभा जडीत वरि किंकिणीची | श्रीदेवदत्त दुरितांतकारी | तुजवीण शंभो मज कोण तारी || २३||

जिवाशिवांची जडली समाधी | विटला प्रपंच तुटली उपाधी | शुद्धस्वरें गर्जति वेद चारी | तुजवीण शंभो मज कोण तारी || २४||

निधानकुंभ भरला अभंग | पहा निजांगें शिव ज्योतिलिंग | गंभीर धीर सुरचक्रधारी | तुजवीण शंभो मज कोण तारी || २५||

मंदार बिल्वें बकुलें सुवासी | माला पवित्र वहा शंकरासी | काशीपुरीं भैरव विश्व तारी | तुजवीण शंभो मज कोण तारी || २६||

जाई जुई चंपक पुष्पजाती | शोभे गळां मालतिमाळ हातीं | प्रतापसूर्य शरचापधारी | तुजवीण शंभो मज कोण तारी || २७||

अलक्ष्यमुद्रा श्रवणीं प्रकाशे | संपूर्ण शोभा वदनीं विकासे | नेई सुपंथें भवपैलतीरीं | तुजवीण शंभो मज कोण तारी || २८||

नागेशनामा सकळां जिव्हाळा | मना जपें रे शिवमंत्रमाळा | पंचाक्षरी ध्यान गुहाविहारी | तुजवीण शंभो मज कोण तारी || २९||

एकांति ये रे गुरुराज स्वामी | चैतन्यरूपीं शिव सौख्यनामीं | शिणलों दयाळा बहुसाल भारी | तुजवीण शंभो मज कोण तारी || ३०||

शास्त्राभ्यास नको श्रुती पढुं नको तीर्थांसि जाऊं नको | योगाभ्यास नको व्रतें मख नको तीव्रें तपें तीं नको ||

काळाचें भय मानसीं धरुं नको दुष्टांस शंकूं नको | ज्याचीया स्मरणें पतीत तरती तो शंभु सोडूं नको || <poem>

PD-icon.svg हे साहित्य भारतात तयार झालेले असून ते आता प्रताधिकार मुक्त झाले आहे. भारतीय प्रताधिकार कायदा १९५७ नुसार भारतीय साहित्यिकाच्या मृत्युनंतर ६० वर्षांनी त्याचे साहित्य प्रताधिकारमुक्त होते. त्यानुसार १ जानेवारी १९५६ पूर्वीचे अशा लेखकांचे सर्व साहित्य प्रताधिकारमुक्त होते. Flag of India.svg